विज्ञान, विचार और कला के उद्घोष के बीच 17th AIPSC का समापन

17th AIPSC: देश में वैज्ञानिक चेतना को मजबूत करने के लिए करेंगे जमीनी कार्रवाई

नई कार्यकारिणी: आयसर पुणे के वैज्ञानिक प्रो. सत्यजीत रथ अध्यक्ष और मध्यप्रदेश बीजीवीएस की आशा मिश्रा चुनी गईं महासचिव
मध्य प्रदेश विज्ञान सभा के एस.आर. आजाद बने आल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के कोषाध्यक्ष
4 दिन में 12 सत्र और 28 कार्यशालाओं में 70 से अधिक विशेषज्ञों ने रखी अपनी बात

एक्सटॉल कॉलेज में 6 से 9 जून के बीच संविधान, समाज, विज्ञान, कृषि, कोविड, महिला, बच्चों, जेंडर, पर्यावरण, किसान, सोशल मीडिया, विकास, आदिवासी, अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक चेतना समेत विविध विषयों पर 70 से अधिक विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। इस दौरान देश के 20 से अधिक राज्यों के आए 800 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस बातचीत में हस्तक्षेप किया। साथ ही अपने अपने राज्यों, क्षेत्रों और समुदायों की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराते हुए संवाद किया। यह मौका था 17वीं अखिल भारतीय ​जन विज्ञान कांग्रेस का (17th AIPSC), जिसे आल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क (AIPSN) की ओर से आयोजित किया गया।

‘आइडिया आफ इंडिया,’ यानी “भारत का विचार” थीम पर आयोजित इस आयोजन (17th AIPSC) के उद्घाटन सत्र को वरिष्ठ पत्रकार और जनसरोकार की पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभ पी. साईनाथ ने संबोधित किया, तो समापन समारोह के मुख्य वक्ता नाल्सर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के कुलपति एवं संविधान विशेषज्ञ प्रो. फैजान मुस्तफा थे। 

कार्यक्रम (17th AIPSC) के उद्घाटन समारोह में स्वागत उद्बोधन वरिष्ठ साहित्यकार रामप्रकाश त्रिपाठी ने दिया। सत्रों के संचालन की जिम्मेदारी विज्ञान सभा के एस आर आजाद, बीजीवीएस के राहुल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता सत्यम पांडे आदि ने निभाई।

समापन समारोह (17th AIPSC) के बाद अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। इसमें अध्यक्ष आयसर पुणे के वैज्ञानिक प्रो. सत्यजीत रथ को नियुक्त किया गया। वहीं मध्यप्रदेश भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आशा मिश्रा को महासचिव और मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के एस.आर. आजाद को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। अंत में यह संकल्प लिया गया कि आने वाले दिनों में देश में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार को लेकर कार्यक्रम बनाए जाएंगे।

समापन सत्र में प्रो. फैज़ान मुस्तफा ने कहा कि कानून का मतलब न्याय होता है, लेकिन कानून के केन्द्र में शक्ति हो गई है। आज स्थिति यह है कि लोगों के न्याय क्या है, बताना मुश्किल हो गया है। पर हमें अन्याय भी नहीं दिख रहा है। किसी के साथ हो रहे अन्याय को देखकर हम विचलित क्यों नहीं हो रहे हैं? यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी दी हुई है। इसका साफ मतलब है कि व्यक्ति के दिल में जो कुछ भी है, उसे बोलने दिया जाए। जो समाज बोलने से रोकता है, वह आगे नहीं बढ़ सकता। जनता की सहमति से सरकार है, तो जनता की भागीदारी सरकार की नीतियों पर बोलकर ही हो सकती है। यह प्रशंसा के रूप में भी हो सकता है या फिर आलोचना के रूप में। उन्होंने कहा कि देश में वैज्ञानिक चेतना के बिना देश को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। देश में नफरती भाषणों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की जरूरत है। आज देश में धर्म, सत्ता और कार्पोरेट का गठजोड़ है, यदि हम इसे समझ जाएंगे, तो संभव है कि कुछ बेहतर कर पाएं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा आज जो देशमें धर्मान्धता फैली है, उसे वैज्ञानिक चेतना से खत्म किया जा सकता है। वैज्ञानिक चेतना के लिए जन विज्ञान आंदोलन से जुड़े लोगों को सामूहिक रूप से आगे आकर काम करना होगा।

शिक्षाविद प्रो. आर. रामानुजम ने कहा कि आज जनता डेटा बन गई है। हमें तकनीक के सही इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनाझारिया मिंज ने कहा कि समाज के उन आयामों की पहचान की जाए, जहां वैज्ञानिक चेतना में कमी है और फिर हमें उन क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।

संसाधनों के बावजूद पिछड़ा हुआ है मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विकास पर बात करते हुए डॉ. योगेश कुमार, सचिन जैन, राजेन्द्र कोठारी, संदीप दीक्षित सहित कई वक्ताओं ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन इसके बावजदू स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार में प्रदेश पिछड़ा हुआ है।

विकास संवाद के निदेशक सचिन जैन ने कहा कि सामाजिक विकास के संकेतकों में मध्यप्रदेश पिछड़ा हुआ है। एक ओर केरल में जहां शिशु मृत्यु दर 6 है, वहीं मध्यप्रदेश में इसकी संख्या 43 है। स्वास्थ्य की स्थिति देखा जाए, तो प्रदेष में 14 हजार से ज्यादा उप स्वास्थ्य केन्द्र चाहिए, लेकिन पिछले 15 सालों से 4 हजार की कमी बनी हुई है। एनएफएचएस के नए आंकड़ों में देखा जाए तो गांवों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग मात्र 23 फीसदी घरों में है।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र कोठारी ने कहा कि मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश की तुलना में दो तिहाई ही है। प्राकृतिक संसाधन के बावजूद कुपोषण, बेरोजगारी और अन्य समस्याएं हैं।

मध्यप्रदेश के मानव विकास पर काम करने वाले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि प्रदेश के 95 फीसदी नेतृत्व यहां की संभावनाओं को छूते ही नहीं है। असीम संभावनाओं के बावजूद हम आगे नहीं बढ़ पाए। राजनीतिक नेतृत्व प्रदेश के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए संसाधनों का दोहन कर रहा है।

किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बादल सरोज ने कहा कि मध्यप्रदेश के संसाधनों को बचाने में यहां के जन आंदोलनों की बड़ी भूमिका रही है, यदि ऐसा नहीं होता, तो विकास के नाम पर जल, जंगल और जमीन को सरकार बेच देती। यह लड़ाई अभी भी जारी है।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरदचन्द्र बेहार ने कहा कि प्रदेश में पंचायत राज को मजबूत करने के बजाय खत्म करने का प्रयास किया जाता रहा है, ऐसे में विकेंद्रीकृत विकास की संभावनाएं खत्म होती है।

समर्थन संस्था के निदेशक डॉ. योगेश कुमार ने कहा कि पंचायतों की ताकत कम करने से शक्तियां केंद्रीकृत हो जाती है, जिसकी वजह ग्राम सरकार की अवधारणा खत्म हो जाती है। यह जरूरी है कि पंचायतों एवं राज्य स्तर के संस्थानों में शक्ति का सही तरीके से बंटवारा किया जाए और हमें पंचायत राज को मजबूत करने का प्रयास करना होगा।

अंतिम दिन समापन सत्र में संविधान और वैज्ञानिक चेतना के साथ मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विकास पर चर्चा की गई। आखिरी सत्र में अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नई समिति भी गठित की गई। इस अवसर पर विज्ञान एवं संविधान से जुड़ी विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही पूरे आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट के रूप में 8 पृष्ठों के अखबार का विमोचन किया गया।

शाम को विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न राज्यों के पुस्तकें एवं उत्पादों के स्टॉल लगाए गए । आंध्रप्रदेश के प्रतिभागियों ने अंधविश्वास एवं भ्रांतियों की वैज्ञानिक व्याख्या के लिए लाइव डेमो का स्टॉल लगाया । “भारत का विचार’’ को लेकर विभिन्न महापुरुषों एवं वैज्ञानिकों के वक्तव्य के साथ वरिष्ठ चित्रकार मनोज कुलकर्णी की पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई गई।

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17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस के दौरान चारों दिन के विभिन्न सत्रों, स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इस आयोजन के उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि को लेकर एक न्यूज बुलेटिन प्रकाशित किया गया। इस न्यूज बुलेटिन के प्रकाशन में राजु नीरा, फरहा खान, ईशान, सीमा कुरुप और सचिन का सहयोग रहा।